Poetry

एक अभिलाषा

वक्त जितना भी गुजरता है, गुजर जाने दे।
कुछ देर तक मुझे माँ के आँचल में ठहर जाने दे।
जिसने मुझ जैसे पत्थर को छूकर बनाया है सोना,
उस पिता के कदमों में मुझे बिखर जाने दे।

जिसकी एक झलक से मेरी आँखों को ठंडक मिलती है।
जिसके दामन में मुझे एक मिट्टी-सी महक मिलती है।
हे ईश्वर! उनके दर्शन को जमाना गुजर गया।
कुछ लम्हों के लिए सही मगर मुझे मेरे घर जाने दे॥

पिता ने मेरी उँगली थामकर मुझे चलना सिखाया है।
उन्होंने मुझे हर ठोकर पर सम्भलना सिखाया है।
राह बनाई उन्होंने मेरी ज़िन्दगी के सफर के लिए,
मुझे उस कठिन राह से हे भगवान गुजर होने दे।

पिता की हर दुआ से मैंने प्यार का असर देखा।
मैंने माँ के आँचल में ममता भरा प्यार का समन्दर देखा।
हे भगवान, आपसे पहले मैं मेरे माता-पिता को पूजता हूँ।
अगर ये गुनाह है, तो यह गुनाह भी कर जाने दे॥

माता पिता के साथ रहने में मुझे सुकून मिलता है।
हर मुसीबत से लड़ने का जुनून मिलता है।
उनके कदमों में भी स्वर्ग जैसी जगह है।
उन्हीं माता पिता के कदमों को छूकर मुझे बिखर जाने दे।

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